Header Ads Widget

Responsive Advertisement

अलवर जिले के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल

 

        अलवर जिले के विभिन्न दर्शनीय स्थल

अलवर राजस्थान का प्रमुख जिला है। अलवर राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 135 किलोमीटर दूर स्थित है। अलवर एक पहाड़ी क्षेत्र है जो राजस्थान राज्य में अरावली की पथरीली चट्टानों के बीच स्थित है। यह स्थान अलवर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस क्षेत्र को मत्स्य देश के नाम से जाना जाता था जहाँ पांडवों ने अपने निर्वासन का 13 वाँ वर्ष भेष बदलकर बिताया था। ऐतिहासिक रूप से यह स्थान मेवाड़ के नाम से भी जाना जाता था। अलवर सुंदर झीलोंभव्य महलोंशानदार मंदिरोंशानदार स्मारकों और विशाल किलों के लिए प्रसिद्द है। यहाँ पर कई पर्यटन स्थल है। तो आईये हम अलवर के विभिन्न दर्शनीय स्थलों के बारे में जानते है :-

1. कंपनी बाग अलवर 


कंपनी बाग अलवर शहर का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। इस गार्डन का निर्माण महाराजा शिवदान सिंह  के द्वारा 1868  ई. में किया गया था।

यह एक बहुत बड़ा और सुंदर बगीचा है। इस गार्डन को "पुरजन विहार" के नाम से भी जाना जाता है।

इस गार्डन में "शिमला ग्रीन हाउस" देखने के लिए मिलता है। शिमला ग्रीन हाउस में आपको गर्मी में भी ठंडी का अहसास होता है। इसलिए यहां के लोकल लोग इसे "समर हाउस" के नाम से भी जानते हैं। इसे महाराजा मंगल सिंह ने बनवाया था।

2. मूसी महारानी की छतरी अलवर


मूसी महारानी की छतरी अलवर का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यह एक ऐतिहासिक स्थल है। यहां पर आपको बहुत सारी छतरियां देखने के लिए मिलती है। मूसी महारानी की छतरी का निर्माण महाराजा विनय सिंह ने 1815 ई में अपने पिता महाराजा बख्तियार सिंह और उनकी पत्नी मूसी रानी की स्मृति में महल के पीछे सागर तट पर करवाया था।

3. राजकीय संग्रहालय अलवर


राजकीय संग्रहालय अलवर शहर का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। इस संग्रहालय में आपको विभिन्न प्रकार की प्राचीन वस्तुओं का संग्रह देखने के लिए मिलता है।

राजकीय संग्रहालय अलवर में आपको बहुत सारे हिंदीसंस्कृतउर्दूफारसीभाषा में लिखे हुए हस्तलिखित ग्रंथ देखने के लिए मिलते हैं। मुगल और राजस्थानी चित्रवाद्य यंत्रवस्त्रगहनेहथियारचंदन और हाथी दांत से बने कलात्मक वस्तुएंऐतिहासिक तलवारशो पीसवन्य जीव का संग्रह देखने के लिए मिलता है।

यहां पर आपको पत्थर की मूर्तियांढोल देखने के लिए मिलता है। यहां पर आपको महल और मंदिरों के मॉडल देखने के लिए मिलते हैं। 

 यह संग्रहालय मूसी रानी की छतरी के पास में ही स्थित है। 

4. अलवर सिटी पैलेस

सिटी पैलेस जिसे विनय विलास महल भी कहा जाता हैअलवर शहर का एक भव्य महल है जो महाराजाओं की प्रतापी जीवन शैली की एक झलक प्रस्तुत करता है। इस भव्य स्मारक का निर्माण राजा बख्तावर ने 1793 ई में करवाया था।

अनेक प्रसिद्द मुगल राजा जैसे बाबरजहाँगीर और राजपूत राजा जैसे महाराजा प्रताप सिंह ने इस किले में समय बिताया है।

यह महल अपने केंद्रीय आँगन के लिए प्रसिद्द है जिसमें संगमरमर से बनाया हुआ कमल के आकार का टॉवर है।

इस भव्य महल के दर्पण और दीवारों का काम तथा साथ ही साथ लघु चित्रों की शानदार श्रेणी दर्शकों के लिए दावत के समान है।

महल के राजकोष में सोने और मखमल से अलंकृत सिंहासन और एक अमूल्य पीने का कप है जो एक अकेले पन्ने को काटकर बनाया गया है। अस्तबल बहुत बड़ा है और यहाँ चार हाथियों वाला दो मंजिली रथ है।

 इस महल में अब एक संग्रहालय है जहाँ शाही यादगारऐतिहासिक वस्तुएँकीमती टुकड़े और कुछ दुर्लभ पांडुलिपियाँ संरक्षित हैं।

यह महल अरावली पर्वत श्रंखला की तलहटी पर बना हुआ है। यह अलवर के राजा का निवास स्थान था। यह महल मूसी महारानी की छतरी के पास में स्थित है।

5. बाला किला अलवर


बाला किला’ किला अर्थ हैं ‘नया किला’ है। यह किला समुद्र तल से 1960 फुट ऊंचाई पर स्थित हैं। जोकि 8 किमी की परिधि में फैला हुआ है।  यह किला कायमखानी शैली में बना हुआ है। दुश्मन पर बंदूकें चलाने के लिए इस किले की दीवारों में करीब 500 छिद्र हैंजिनमें से 10 फुट की बंदूक से भी गोली चलाई जा सकती थी।

यहाँ 6 प्रमुख द्वार जयपोललक्ष्मण पोलसूरजपोलचांदपोलअंधेरी द्वार और कृष्णा द्वार से बाला किला तक पहुंचा जा सकता है। दुश्मनों पर नजर रखने के लिए 15 बड़े 51 छोटे बुर्ज और 3359 कंगूरे हैं। यह स्मारक अपने चिनाई के माक और भव्य संरचनात्मक डिज़ाइन के लिए प्रसिद्द है।

हसन खान मेवाती ने 1551 ईस्वी में इस किले का निर्माण किया था। इसके बादबाला किला पर मुगलोंमराठों और जाटों ने शासन किया था। अंत में 1775 ई में कच्छवाहा राजपूत प्रताप सिंह ने इस किले पर कब्जा कर लिया और इसी समय अलवर शहर की नींव रखी। बाबरमुग़ल सम्राट ने किले में एक रात बिताई थी जबकि जहांगीर निर्वासन अवधि के दौरान तीन साल तक रहे और उस समय उन्होंने इसे सलीम महल के रूप में नामित किया। किले के जिस कमरे में जहांगीर ठहरा थाउसे सलीम महल के नाम से जाना जाता है।

बाला किला क्षेत्र में कुंभ निकुंभों की कुलदेवीकरणी माता मंदिरतोप वाले हनुमान जीचक्रधारी हनुमान मंदिरसीताराम मंदिर सहित अन्य मंदिरजय आश्रमसलीम सागरसलीम बारादरी स्थित हैं।

6. जयसमंद झील अलवर


जयसमंद झील अलवर में घूमने वाली एक मुख्य जगह है। यह झील बहुत बड़े क्षेत्र में फैली हुई है।अलवर शहर से 6 किलोमीटर दूर स्थित जय समंद झील एक कृत्रिम झील है। इस झील का निर्माण महाराजा जय सिंह ने 1910 ई में करवाया था। इस झील के किनारे आपको बहुत सारी सुंदर छतरियां देखने के लिए मिलती हैजो रेड सेंडस्टोन से बनी हुई है। इस झील का निर्माण पानी को एकत्र करने के लिए किया गया था। बरसात में इस झील का नजारा बहुत सुंदर रहता है। 

7. भानगढ़ का किला


भानगढ़ का किला भारत के सबसे भूतिया स्थान के नाम से जाना जाता है और यह किला तभी शायद सबसे बड़ा अनसुलझा रहस्य बना हुआ है। रहस्यमय होने की वजह से यह जगह कई लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है।

भानगढ़ नगर की स्थापना आमेर के राजा भगवत दास जी ने 16वीं शताब्दी में की थीजिसे बाद में राजा मान सिंह के भाई माधो सिंह की रियासत की राजधानी बना दिया गया था।

अधिकांश लोगों का मानना है कि भानगढ़ किला भूतिया है। सूर्यास्त के बाद किले में प्रवेश करना बहादुरी और बेवकूफी का काम हैक्योंकि इसे पैरानॉर्मल एक्टिविटी का केंद्र माना जाता है। यही वजह है कि आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने रात को यहां जाना बैन किया है।

वैज्ञानिक भानगढ़ की कहानियों को खारिज करते हैंलेकिन गांव के लोग अभी भी इस किले को भूतिया मानते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने एक औरत के चिल्लानेचूड़ियां तोड़ने और रोने की आवाजें सुनी हैं। साथ ही उनका कहना है कि किले से संगीत की आवाजें भी आती हैं और कभी-कभी उन्हें परछाइयां भी दिखाई देती हैं।

भानगढ़ का किला में आपको केशवराय मंदिरपुरोहित जी की हवेलीसोमेश्वर मंदिरगोपीनाथ मंदिरगणेश मंदिरमकबराअजमेरी गेटलाहौरी गेटदिल्ली गेटवॉच टावरराज महलमंगला देवी मंदिरजोहरी बाजार देखने के लिए मिलता है। यह सभी जगह अब खंडहर अवस्था पर यहां पर मौजूद है। यहां पर आपको बावड़ी भी देखने के लिए मिलती है।

8. सिलीसेढ़ महल और सिलीसेढ़ झील अलवर

सिलीसेढ़ महल और सिलीसेढ़ झील अलवर शहर का एक मुख्य टूरिस्ट स्पॉट है। सिलीसेढ़ महल अलवर शहर मेंअलवर जयपुर राजमार्ग से थोड़ी ही दूरी पर सिलीसेढ़ नाम की जगह पर स्थित है। सिलीसेढ़ महल पहाड़ों के बीच में बना हैजिसे देखकर ऐसा लगता हैकि जैसे यह पहाड़ों के बीच में लटका हुआ है। सिलीसेढ़ महल के पास ही सिलीसेढ़ झील देखने के लिए मिलती हैजिसका दृश्य बहुत ही अद्भुत लगता है। अलवर शहर से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिलीसेढ़ झील पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल है। 7 किलोमीटर के क्षेत्र में फेली हुई सिलीसेढ़ झील राजस्थान की सबसे खुबसूरत झीलो और अलवर कि लोकप्रिय जगहों में से एक है। इस झील का निर्माण  1845 में अलवर शहर को पानी की आपूर्ति के लिए किया गया था जिसकी स्थापना का श्रेय महाराजा विनय खान को दिया जाता है।इस झील में बोटिंग का मजा लिया जा सकता है।सिलीसेढ़ झील में मगरमच्छ भी है।

9. योगी भर्तहरि नाथ मंदिर अलवर


योगी भर्तहरि नाथ एक महान संत थे। योगी भर्तहरि नाथ उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के भाई थे। उन्होंने अपने जीवन में राजा के रूप में कार्य किया और उसके बाद उन्होंने सन्यास ग्रहण किया और सन्यासी बन गए। यहां पर आपको संत भर्तहरि नाथ जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है और योगी भर्तहरि नाथ जी की मूर्ति देखने के लिए मिलती है। यहां पर उनकी समाधि बनाई गई है।

यहां पर आपको एक प्राकृतिक कुंड देखने के लिए मिलता हैजिसमें से जल बहता रहता है और बहुत सारे श्रद्धालु यहां पर आकर जल में स्नान करते हैं। यह पर एक गुफा भी देखने के लिए मिलती हैजो प्राकृतिक है। यह जगह चारों तरफ से ऊंची ऊंची पहाड़ियों से घिरी हुई है।

10. सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर


सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह अलवर से करीब 35 किलोमीटर दूर है। यहां पर आपको मुख्य रूप से टाइगर देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर टाइगर को संरक्षित करके रखा गया है। अरावली पहाड़ियों में बसा सरिस्का नेशनल पार्क लगभग 800 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है जिसे 1982 में एक राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया था। घास के मैदानशुष्क पर्णपाती वन और चट्टानी परिदृश्य को कवर करता हुआ सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य अब एक सरिस्का रिजर्व टाइगर के रूप में जाना जाता है।

यह अपने राजसी रॉयल बंगाल टाइगर्स के लिए प्रसिद्ध है जो बाघों (रणथंभौर से) को सफलतापूर्वक स्थानांतरित करने वाला पहला बाघ अभयारण्य है। सरिस्का नेशनल पार्क इतिहास प्रेमियों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियोंवन्यजीव उत्साही लोगों के लिए लोकप्रिय बना हुआ है जो अलवर में घूमने के लिए आदर्श स्थानों में से एक है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व में आप अगर घूमने के लिए आते हैंतो आपको जिप्सी की बुकिंग करवानी पड़ती है। सरिस्का टाइगर रिजर्व में एंट्री करने के लिए दो गेट है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व में आपको टाइगर देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर आपको चित्तीदार हिरणनीलगायमोरमगरमच्छलंगूरजंगली सूअर और भी बहुत सारे जानवर देखने के लिए मिलते हैं।  यहां पर आपको एक म्यूजियम भी देखने के लिए मिलेगाजहां पर बहुत सारे जानवरों के बारे में जानकारी दी गई है। सरिस्का टाइगर रिजर्व में आपको जंगल का भी सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। 

11. नारायणी माता मंदिर अलवर


नारायणी माता मंदिर अलवर जिले का एक प्रमुख मंदिर है। नारायणी माता सेन समाज की कुलदेवी है। यह मंदिर अलवर में रुंध में स्थित है। यह मंदिर अलवर जयपुर राजमार्ग पर स्थित है। यह मंदिर प्राकृतिक परिदृश्य में स्थित है। यहां पर चारों तरफ ऊंचे ऊंचे पहाड़ देखने के लिए मिलते हैं और बीच में यह मंदिर बना हुआ है। मंदिर के गर्भ गृह में नारायणी माता की बहुत ही सुंदर प्रतिमा देखने के लिए मिलती है।

नारायणी माता मंदिर में दो कुंड देखने के लिए मिलते हैं। इन कुंडों का पानी प्राकृतिक तरीके से आता है। इन कुंडों के पानी में सभी लोग स्नान करते हैं। यहां पर भंडारा भी होता हैजिसका खाना बहुत स्वादिष्ट रहता है। यहां पर ठहरने के लिए धर्मशाला भी हैजहां पर श्रद्धालु रुक सकते हैं।

नारायणी माता मंदिर राजस्थान के मुख्य शहर अलवर से लगभग 80 और अमनबाग से 14 किलोमीटर दूर सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान के किनारे पर स्थित अलवर का एक बहु प्रतिष्ठित मंदिर है। जहा नारायणी माता भगवान शिव की पहली पत्नी सती का अवतार रूप मानी जाती है। नारायणी माता मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया है और इसे बहुत अच्छी तरह से सजाया गया है। मंदिर की साइड में छोटा सा गर्म पानी का झरना इसे और अधिक लोकप्रिय बनाता है। नारायणी माता मंदिर भारत में सैन समाज का एकमात्र मंदिर है जिसकी पवित्रता माउंट आबूपुष्कर और रामदेवरा में मंदिरों के समान मानी जाती हैजो सैन समाज के लिए उनकी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

Post a Comment

0 Comments

सीकर जिले के महत्वपूर्ण  दर्शनीय स्थल